दिल्ली अदालत परिसर का प्रतिनिधि दृश्यफांसी

Ankit Sharma Murder Case: ‘ताहिर हुसैन को फांसी क्यों नहीं मिली?’ IB अधिकारी के भाई ने उठाए सवाल

Ankit Sharma Murder Case: ‘अंकित को 51 चोटें आई थीं, ताहिर हुसैन को फांसी क्यों नहीं मिली?’ IB अफसर के भाई ने उठाए सवाल

दिल्ली अदालत परिसर का प्रतिनिधि दृश्यफांसी
अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद न्यायालय परिसर का प्रतीकात्मक दृश्य।

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान मारे गए इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अदालत द्वारा पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने फैसले पर निराशा जताई है। अंकित शर्मा के भाई ने सवाल उठाया कि इतनी क्रूर हत्या के बावजूद दोषियों को फांसी की सजा क्यों नहीं दी गई। यह मामला एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है।

अंकित शर्मा के भाई ने क्या कहा?

मीडिया से बातचीत में अंकित शर्मा के भाई ने कहा कि उनके भाई के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान थे और हत्या बेहद निर्ममता से की गई थी। उनका कहना है कि परिवार को उम्मीद थी कि अदालत इस मामले को “दुर्लभ से दुर्लभतम” (Rarest of Rare) मानते हुए मृत्युदंड देगी। उन्होंने कहा कि वे आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार करेंगे।

अदालत ने क्या फैसला सुनाया?

दिल्ली की अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित अन्य दोषियों को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। इससे पहले अभियोजन पक्ष ने अदालत से मृत्युदंड की मांग की थी और हत्या को अत्यंत क्रूर एवं सुनियोजित बताते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी का मामला बताया था।

फांसी की मांग क्यों की गई थी?

अभियोजन पक्ष का तर्क था कि अंकित शर्मा की हत्या अत्यधिक क्रूर तरीके से की गई थी। अदालत में प्रस्तुत दलीलों के अनुसार उनके शरीर पर 51 चोटों के निशान और कई घातक घाव पाए गए थे। इसी आधार पर दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई।

अब आगे क्या हो सकता है?

सजा सुनाए जाने के बाद ताहिर हुसैन ने उच्च न्यायालय में फैसले को चुनौती देने की बात कही है। दूसरी ओर पीड़ित परिवार भी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऐसे में इस मामले की आगे की सुनवाई उच्च न्यायालय में हो सकती है, जहां सजा को लेकर दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे।

मामले पर बनी हुई है सबकी नजर

यह फैसला 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक माना जा रहा है। अदालत के निर्णय के बाद कानूनी, राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब सभी की नजर संभावित अपील और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर बनी हुई है।

अदालत ने फांसी की सजा क्यों नहीं दी?

भारतीय कानून के अनुसार मृत्युदंड केवल उन मामलों में दिया जाता है जिन्हें अदालत “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” श्रेणी का मानती है। इस मामले में अभियोजन पक्ष ने मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने सभी तथ्यों, सबूतों और कानूनी पहलुओं पर विचार करने के बाद दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। अदालत के फैसले के बाद पीड़ित परिवार ने इस पर असंतोष जताया है।

परिवार और कानूनी पक्ष की आगे की रणनीति

अंकित शर्मा के परिवार ने कहा है कि वे अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें उम्मीद थी कि दोषियों को मृत्युदंड मिलेगा। दूसरी ओर दोषी पक्ष भी उच्च न्यायालय में सजा के खिलाफ अपील कर सकता है। ऐसे में इस मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की संभावना है।

निष्कर्ष

आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड का फैसला एक बार फिर न्याय व्यवस्था, मृत्युदंड और उम्रकैद को लेकर बहस का विषय बन गया है। अदालत ने दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि पीड़ित परिवार का मानना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड दिया जाना चाहिए था। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. अंकित शर्मा कौन थे?

अंकित शर्मा इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) में कार्यरत अधिकारी थे, जिनकी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान हत्या कर दी गई थी।

2. ताहिर हुसैन को क्या सजा मिली?

दिल्ली की अदालत ने ताहिर हुसैन और अन्य दोषियों को अंकित शर्मा हत्याकांड में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

3. पीड़ित परिवार ने क्या प्रतिक्रिया दी?

अंकित शर्मा के भाई ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि दोषियों को फांसी की सजा मिलेगी और उन्होंने अदालत के फैसले पर निराशा जताई।

4. क्या इस फैसले को चुनौती दी जा सकती है?

हां, दोनों पक्ष कानून के अनुसार उच्च न्यायालय में अपील कर सकते हैं।

5. यह मामला क्यों चर्चा में है?

यह 2020 दिल्ली दंगों से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक है और अदालत के फैसले के बाद इस पर व्यापक चर्चा हो रही है।

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