सावन माह में भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालुओं का प्रतिनिधि दृश्यशिव

Sawan 2026: भगवान शिव का प्रिय सावन आज से शुरू, जानें 4 सोमवारी और शुभ योग का बड़ा महत्व

Sawan 2026: आज से शुरू हुआ भगवान शिव का प्रिय सावन महीना, श्रवण नक्षत्र और आयुष्मान-सौभाग्य योग का शुभ संयोग

सावन माह में भगवान शिव का जलाभिषेक करते श्रद्धालुओं का प्रतिनिधि दृश्यशिव
सावन 2026 की शुरुआत पर शिवलिंग का जलाभिषेक करते श्रद्धालुओं का प्रतीकात्मक दृश्य

भगवान शिव को समर्पित सावन (श्रावण) माह की शुरुआत आज गुरुवार से हो गई है। इस बार सावन का आरंभ श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग जैसे शुभ संयोगों में हो रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसे दुर्लभ योग में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक, व्रत और शिव मंत्रों का जप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सावन मास 28 अगस्त 2026 तक रहेगा।

सावन में बन रहे हैं कई शुभ योग

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। इस वर्ष सावन की शुरुआत श्रवण नक्षत्र के साथ आयुष्मान और सौभाग्य योग में होने से शिव उपासना का महत्व और बढ़ गया है। श्रद्धालु इस दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और भस्म अर्पित कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

चार सोमवार का विशेष संयोग

ज्योतिषाचार्य आचार्य राकेश झा के अनुसार इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिन्हें भगवान शिव की विशेष आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इनमें दो सोमवार कृष्ण पक्ष और दो सोमवार शुक्ल पक्ष में आएंगे।

सावन 2026 के सोमवार इस प्रकार हैं:

  • पहली सोमवारी: 3 अगस्त 2026
  • दूसरी सोमवारी: 10 अगस्त 2026
  • तीसरी सोमवारी: 17 अगस्त 2026
  • चौथी एवं अंतिम सोमवारी: 24 अगस्त 2026

क्यों चढ़ाया जाता है शिवलिंग पर जल?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने भगवान शिव का जलाभिषेक किया। तभी से सावन माह में शिवलिंग पर जल अर्पित करने की परंपरा चली आ रही है।

शिवपुराण में भी जलाभिषेक को भगवान शिव की सबसे प्रिय उपासना बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया जलाभिषेक सुख, शांति और मनोकामना पूर्ति का माध्यम बनता है।

सावन में भगवान शिव की पूजा का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस पूरे माह में श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, भांग और फल अर्पित कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई शिव आराधना से जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

सावन में किन बातों का रखें ध्यान?

  • प्रतिदिन स्नान कर भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करें।
  • शिवलिंग पर स्वच्छ जल या गंगाजल से जलाभिषेक करें।
  • बेलपत्र अर्पित करते समय उसकी तीनों पत्तियां साबुत हों।
  • “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जप करें।
  • जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और जल का दान करें।

सावन 2026 की प्रमुख तिथियां

पर्व / तिथितारीख
सावन प्रारंभ30 जुलाई 2026
पहली सोमवारी3 अगस्त 2026
दूसरी सोमवारी10 अगस्त 2026
तीसरी सोमवारी17 अगस्त 2026
चौथी एवं अंतिम सोमवारी24 अगस्त 2026
सावन समापन28 अगस्त 2026

निष्कर्ष

सावन 2026 का आरंभ कई शुभ योगों के साथ हुआ है, जिससे इस माह का धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। श्रवण नक्षत्र, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और व्रत करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु पूरे महीने श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव आराधना कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. सावन 2026 कब से शुरू हुआ?

सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से हुई है।

2. सावन 2026 का पहला सोमवार कब है?

पहली सावन सोमवारी 3 अगस्त 2026 को है।

3. इस बार सावन में कितनी सोमवारी हैं?

सावन 2026 में कुल चार सोमवारी पड़ रही हैं।

4. सावन में शिवलिंग पर जल क्यों चढ़ाया जाता है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव ने हलाहल विष का पान किया था। उसके प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उनका जलाभिषेक किया, तभी से यह परंपरा प्रचलित है।

5. सावन में पूजा का प्रमुख लाभ क्या माना जाता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन में भगवान शिव की आराधना करने से सुख, शांति, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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Official Source

Shiva Purana (Reference)
Ministry of Culture, Government of India